एक भोजपुरीया जवान की डायरी

ऊहाँ से ईहाँ तक के किस्‍सा कहानी

Tuesday, February 21, 2006

 
आज अंतर्राष्‍ट्रीय मातृभाषा दिवस हवे. सबके एह दिन के शुभकामना. शायद शुकुल जी कहले रहलन जे आपन भाषा छोड़ के दोसर भाषा के बढावल तऽ अईसन भईल जईसे आपन महतारी के छोड़ के पड़ोसी के सेवा कईल. बहुत पुरान सपना बा जे भोजपुरी मे एगो उपन्‍यास लिखेम. आज सपना ईहवा लिख देहनी तऽ आशा बा जे एकदिन किताब-वो लिखा जाई.

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