एक भोजपुरीया जवान की डायरी

ऊहाँ से ईहाँ तक के किस्‍सा कहानी

Friday, February 17, 2006

 
जिंदगी मे विरोधाभास के कमी ना रहल कहियो. बताईं ना लईकाही आदमी पहाड़ पे बितऽवलख तबो ऊँचाई से डर लागेला. ई साला बिन माथा-गोड़ी के डर से जिंदगी परेशान बा. गईल रहनी राँकी-माऊटेंन पर स्‍कीईगं करे एक बेर फेर. सोचले रहे आदमी जे अबकी त साफ डर निकाल देवे के बा. एकदमजी-जान लगा के चढत गईनी एक लिफ्‍ट से दोसरा लिफ्‍ट पर - शुरु कईनी बिगिनर्स से आ ईंटरमिडियट ले जात जात बुझा गईल जे ई साला एतनाआसानी सेजाए वाला मर्ज ना हवे. २५ बेर से जादे बईठला के बाद भी साला जईसे लिफ्‍टके ऊँचाई २०-२५ फुट से ऊपर होखे हमार होश गायब होखल शुरु हो जाए. केतनाकोशिश कईनी मन के समझावे के लेकिन ई साला डर कहा जाला. पहिले भी कई बारकोशिश कईले बानी लड़े के लेकिन अब बिश्‍वास हो गईल बा जे ईलाज करावे केपड़ी. जिदंगी मे गर आदमी एक बेर चिड़ई खानी उड़ के ना देखलख तऽ का मजाभईल जियला के.

खैर, स्‍कीईंग तऽ जे भईल से भईल, मजा खूब आईल. बहुत दिन बाद मौका मिलल८-९ के ग्रुप मे बकवास करे के. जड़ीए से होस्‍टल मे रहला से आदत बिगड़गईल बा बडका-बडका ग्रुप मे ठठ्‍ठा करत आ अब वईसन जमात ना मिले त कबो-कबो कउचेला.

आजकल ईटली मे विंटर ओलपिंक चलऽता. देखनी कुच दिन पहिले जे आपन भारत से भी४ जना पहुँच गईल बाड़े. देख के एक मिनट खतिरा खुशी भईल लेकिन फेर दिमागजरे लागल. बहुत निराश कईले बा ई आपन देश. दिन रात बाहरा मे आदमी एक मौकाखोजत रहेला जे ई फिरंगीयन के सामने एक बेर देश के नाम पर माथा उठ जाये.सौभाग्‍य के बात हवे जे पाकिस्‍तान चाहे बांग्‍लादेश मे जनम ना भईल.

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